Sunday, 17 August 2014

विज्ञापन के बिना समाज आधुरा

भारत एक विकसित देश है | जिसमे विजापन के जरिये समाज को आपने विचार विमर्श प्रस्तुत कर सकते है | समाज में हर व्यक्ति अकबार पड़ता है और उसमे विज्ञापन अवश देखता है कि कहाँ पे क्या अच्छी वस्तुयें मिल रही है विज्ञापन  शिक्षा के लिये और वयापार आदि के लिये  निकले जाते है  कोई भी नहीं वास्तु विज्ञापन के जरिये ही लोगो तक पहुचता है जैसे ओल्क्स, कुइकर कभी किसे नहीं सोचे होगा  की घर  बैठे अब सामान बिक जायेगा ....
ये सब विज्ञापन की ही दें है समाज में विज्ञापन के जरिये लोगो को बताया जाता है की बच्चो को पोलियो ड्राप पिलाना या न पिलाना कितना लाभकारी और कितना हानिकारक है | इसलिये आज हमारा देश पोलियो फ्री देश है  |

Saturday, 16 August 2014

जिंदगी की जंग

हमारे समाज में पहले तो लड़की  होना एक अभिशाप ही माना जाता था I लेकिन फिर  धीरे -धीरे लोगो  का नजरिया  बदला और लोगो ने लडकियों  को आगे  बढ़ाने को सोचा क्या आपको लगता है की पूरी आज़ादी से लडकियाँ अपनी जिंदगी जी पा रही  है ?
एक गैर सरकारी संगठन मैनकाइंड इन एक्शन फॉर रूलर ग्रोथ ने एक बड़ा खुलासा किया है I इस एन.जी.ओ का दावा है की ये लडकियाँ मानव तस्करी का शिकार हो रही हैं I अब सवाल यह उठता है कहीं ये लडकियाँ बांग्लादेश के रास्ते विदेशों में तो नहीं सप्लाई की जा रही हैं I इस जिले से लगभग एक साल के अन्दर 473 लडकियाँ लापता हुई हैं I समाज के डर से लापता लडकियों ने रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करायी I हम कब तक समाज के डर से जीते रहेंगे और बहु-बेटियों की तस्कारियों पे सिर्फ मौन साध लेंगे I
आखिर कब तक ............................... और क्यों ???
 धंधा करवाने और गुलाम बनाने के लिए सस्ते दामो में लडकियाँ खरीदी जाती हैं I बड़ी उम्र की महिलओं की कीमत देह  व्यापार के धंधे में ज्यादा होती है I ज्यादा उम्र की महिलाओं  के साथ तस्करी भी की  जा रही है I जी हाँ  मजदूर वर्ग उन महिलाओं को सस्ते दामो में खरीद कर या तो फिर से तस्करी कर रहे हैं या फिर हमेशा-हमेशा के लिए गुलाम बना लेते हैं I महिला अयोग ने अपने रिपोर्ट मे खास कर इस  बात का ज़िक्र किया है कि देह व्यह्पर के लिए  तस्करी की  जाने वाली लडकियाँ या तो गरीब होती है या तो फिर अनुसूचित जाति की होती है I कभी-कभी ऐसे मामले पकडे भी जाते है तो पुलिस इन मामलो को गंभीरता से नही लेती है I पुलिस दोषियों के खिलाफ एससी-एसटी प्रिवेंशन ऑफ़ अट्रोसिटी एक्ट 1989 के तहत मामला दर्ज नहीं करती है I जिससे दोषी छूट जाते है और लडकियों  की फिर से तस्करी करना शुरू कर देते हैं I
ऐसे सिर्फ एक या दो केस नहीं है ऐसे बहुत सारे  केस है जिन पर आपने और हमने कभी सोचा ही नहीं I
देश के विभिन्न राज्यों से आ रही खबरों से सरकार आराम की नींद सो रही है पर उनके माता पिता की रातो की नींद उड़ गयी है I हम बात कर रहे है छत्तीसगढ़ की ,जी हाँ ! पिछले ढाई साल में 5000 से ज्यादा लडकियाँ गायब हो गयी है I इस दौरान 3700 लडकियाँ वापस घर लौटी है लेकिन बाकि की करीब 1300 का क्या हुआ कुछ पता नहीं I अंत में मै यही कहना चाहूंगी कि लडकियों को अच्छी शिक्षा दे तभी ऐसे जटिल मुद्दों पर कुछ सुधार आयगा I और पुलिस प्रशाशन को भी रिपोर्ट दर्ज करना चाहिए जिसे उस मुर्जिम को सजा मिल सके I

Friday, 15 August 2014

कूड़ेदान की आवाज

लाल , हरा ,नीला रंग का कूड़े दान कभी सोचा नहीं था कि इतना कचरा मुझमे कभी भरा जायेगा जब जिसका मन होता है खता है रेपर कूड़ेदान में दाल देता है | हा मैं जानती हूँ मेरा जन्म इसी लिया हुआ है लेकिन मुझे कभी कभी साफ तो कर सकते हो .............