कहानी के चरक्टेर्स
अपर्णा - टीचर
सुरभि - लीड
प्रीटी ,अदिति - फ्रेंड्स ऑफ़ सुरभि
ईशा - विल्लन
जयंती , आरती - फ्रेंड्स ऑफ़ ईशा
मोहन- आत्मा
सौरभ - बॉय
अमरीन - सर्वेंट
वर्तिका - मोहन गर्ल फ्रेंड
अपर्णा कल हमें समर कैंप के लिए मनाली जाना है | कल सुबह मुझे आठ बजे तक सब स्टूडेंट्स ग्राउंड में मिले
बी पुन्क्टुँल टू कॉलेज डोंट बी लेट
आगला दिन - कॉलेज ग्राउंड में
अपर्णा - आप सब रेडी है मनाली जाने के लिए आप सब बस में बैठ जाये
एक घंटे बाद
प्रीटी - यार तुम लोग कितने बोरिंग हो
अदिति - हा यार क्यों न अन्ताक्षरी खेला जाये ....
जयंती - ये लोग कितना शोर मचा रहे है
कुछ देर बाद मनाली में
ईशा - क्या! क्या हम इस थर्ड क्लास होटल में रुकेगे ...
अपर्णा - ये लो अपने अपने रूम की चाबी और फ्रेश हो जाओ
प्रीटी- हम तीनो को एक ही रूम में रहना है
सुरभि लीड - तो क्या बेस्ट फ्रेंड्स एक रूम भी शेयर नहीं कर नहीं कर सकती ये देखो 306 आगया यही तो हमारा रूम है चलो रेस्ट करे थोरी देर बाद
सुरभि - प्रीटी यहाँ रूम 301 पे ताला क्यों लगा है और मेनेजर ने तो कहा था की कोई रूम एक्स्ट्रा खली नहीं है
प्रीटी- अरे छोडो चलो वरना टीचर यहाँ आ जाएँगी हमें ढूनते ढूनते
थोड़ी देर बाद ग्राउंड में
अपर्णा - आब हम यहाँ से 1किलो मीटर दूर माउंट क्लाइम्बिंग के लिए जायेंगे
ईशा - अरे यार जयंती में माउंट क्लाइम्बिंग के लिए नहीं जाउंगी आखिर एक दिन तो हमे रेस्ट के लिए मिलना ही चाहिए
आरती - तो तुम रूम में ही रह कर आराम करो हम टीचर से कोई बहाना बना देंगे
माउंट क्लाइम्बिंग के बाद
अदिति - यार बहुत थक गये जा के डायरेक्ट सो जाउगी
सुरभि - ये प्रीटी यहाँ पे टला अभी भी लगा हुआ है काफी पुराना ताला लगता है क्यों न इसके बारे में किसी से पूछे
प्रीटी - किस्से पुछा हम तो किसी को भी यहाँ जानते भी नही
सुरभि - क्यों न यहाँ की नौकरानी से पूछे उसको जरूर पता होगा
अदिति - पता तो होगा पैर क्या वो बतैगी
सुरभि - हे सुनो तुमारा नाम क्या है मेरा नाम अमरीन है
प्रीटी - तुम यहाँ कबसे काम कर रही हो
अमरीन - जी काफी साल हो गये पर आप क्यों पुच रही हो
सुरभि - ये 301कमरा हमेशा बंद क्यों रहता है
अमरीन - यहाँ एक लड़का रहता था उसका घर था उसका नाम मोहन था वो एक लड़की से प्यार करता था मगर
उस लड़की के पिता ने उस लड़की की शादी किसी और कर दी और मोहन को मरवा दिया और उसकी आत्मा आज तक यही भटक रही है ....
अदिति - ये तो बहुत इमोशनल स्टोरी है और हॉरर भी
सुरभि - यार बेचारा वो तो बहुत सीधा था क्या गलती थी बचारा मारा गया
चलो सो जाते है प्रीटी रात बहुत हो गयी है
रात के बारह बजे
सुरभि - ये चिलाने की आवाज कहाँ से आरही है प्रीटी तो सो रही है शायद उस नौकरानी की बात से डर रही हूँ
नेक्स्ट डे मोर्निंग
सुरभि - यार मेरी तबियत थोड़ी ख़राब है आज में तुम लोगो के साथ नहीं जा पाऊँगी तुम लोग क्लाइम्बिंग के लिए जाओ
थोडा पानी पी लेती हूँ अरे जग में तो पानी ही नही है नीचे से लाना पढ़ेगा
सौरभ - हेल्लो में सौरभ हूँ आप यहाँ पे क्या करने आई है में तो
घूमने आया हूँ
सुरभि - में यहाँ समर कंप पर आई हूँ अपने फ्रेंड्स और टीचर के साथ चलो मेरा रूम में में काफी बोर हो रही हूँ
प्रीती - सुरभि ये कोन है
सुरभि - ये सौरभ है ये भी हमारे होटल में ही रुका है घूमने आये है
सौरभ - हेलो आप कौन
प्रीती
आरती हम सुरभि के फ्रेंड्स है
सौरभ - बाय अब में जा रहा हूँ तुम लोग एन्जॉय करो
प्रीती - ओ हो तुमारा तो बड़ाआचा फ्रेंड बन गया एक दिन में
अदिति - काफी खुश लग रही हो
सुरभि - बस अब चुप भी हो तुम लोग
अदिति - वैसा देखने में इतना बुरा भी नही लगता
सुरभि - बस अब अब सो जाओ
कुछ दिनों तक वो लोग एक दूसरा के साथ टाइम स्पेंट करते है और काफी आचे दोस्त बन जाते है और वो दोनों प्यार करना लगते है
फिर एक दिन लड़की के जाने के जाने ka दिन आया जाता है वो दोनों काफी उदास हो जाते है जब सुरभि आपना घर पचुती है वो सौरभ को भी वहाँ बुला लेती है वोउसको वाही परउसकी जॉब लगवा देती है पैर एक सच जो सौरभ अपनी ज़िन्दगी के बारे में सुरभि से बताना चाहता था
सौरभ - तुमे यद् है न सुरभि जब तुमनेहोटल की नौकरानी से रूम नो 301 के बारे में पुछा था तो उसने एक लड़के मोहन के बारे में बताया था में ही वो हूँ हाँ में उसकी आत्मा हूँ होटल में किसी को ढूंड रहा हूँ फिर एक दिन मैंने तुमको देखा तुमारी शकल बिलकुल वर्तिका की तरह है
सुरभि क्या तुम आत्मा हो?? मैंने तो तुम्हे अपना सबसे अच दोस्त माना था और तुम ...
सौरभ - मैं जनता हूँ मैंने गलत किया मुझे तुमकोपहले ही बता देना चाहिए था मगर नही बता सका
सुरभि - तो क्या तुम उस दुनिया को मेरा लिए भूला दोगेमेरे साथ आत्मा बनके रहोगे
सौरभ हाँ क्यों नही
सुरभि - क्या तुम मुझेसे शादी करोगे
सौरभ - ओह हाँ मतलब तमने मुझे माफ़ कर दिया थैंक यू सो मच ....
अपर्णा - टीचर
सुरभि - लीड
प्रीटी ,अदिति - फ्रेंड्स ऑफ़ सुरभि
ईशा - विल्लन
जयंती , आरती - फ्रेंड्स ऑफ़ ईशा
मोहन- आत्मा
सौरभ - बॉय
अमरीन - सर्वेंट
वर्तिका - मोहन गर्ल फ्रेंड
अपर्णा कल हमें समर कैंप के लिए मनाली जाना है | कल सुबह मुझे आठ बजे तक सब स्टूडेंट्स ग्राउंड में मिले
बी पुन्क्टुँल टू कॉलेज डोंट बी लेट
आगला दिन - कॉलेज ग्राउंड में
अपर्णा - आप सब रेडी है मनाली जाने के लिए आप सब बस में बैठ जाये
एक घंटे बाद
प्रीटी - यार तुम लोग कितने बोरिंग हो
अदिति - हा यार क्यों न अन्ताक्षरी खेला जाये ....
जयंती - ये लोग कितना शोर मचा रहे है
कुछ देर बाद मनाली में
ईशा - क्या! क्या हम इस थर्ड क्लास होटल में रुकेगे ...
अपर्णा - ये लो अपने अपने रूम की चाबी और फ्रेश हो जाओ
प्रीटी- हम तीनो को एक ही रूम में रहना है
सुरभि लीड - तो क्या बेस्ट फ्रेंड्स एक रूम भी शेयर नहीं कर नहीं कर सकती ये देखो 306 आगया यही तो हमारा रूम है चलो रेस्ट करे थोरी देर बाद
सुरभि - प्रीटी यहाँ रूम 301 पे ताला क्यों लगा है और मेनेजर ने तो कहा था की कोई रूम एक्स्ट्रा खली नहीं है
प्रीटी- अरे छोडो चलो वरना टीचर यहाँ आ जाएँगी हमें ढूनते ढूनते
थोड़ी देर बाद ग्राउंड में
अपर्णा - आब हम यहाँ से 1किलो मीटर दूर माउंट क्लाइम्बिंग के लिए जायेंगे
ईशा - अरे यार जयंती में माउंट क्लाइम्बिंग के लिए नहीं जाउंगी आखिर एक दिन तो हमे रेस्ट के लिए मिलना ही चाहिए
आरती - तो तुम रूम में ही रह कर आराम करो हम टीचर से कोई बहाना बना देंगे
माउंट क्लाइम्बिंग के बाद
अदिति - यार बहुत थक गये जा के डायरेक्ट सो जाउगी
सुरभि - ये प्रीटी यहाँ पे टला अभी भी लगा हुआ है काफी पुराना ताला लगता है क्यों न इसके बारे में किसी से पूछे
प्रीटी - किस्से पुछा हम तो किसी को भी यहाँ जानते भी नही
सुरभि - क्यों न यहाँ की नौकरानी से पूछे उसको जरूर पता होगा
अदिति - पता तो होगा पैर क्या वो बतैगी
सुरभि - हे सुनो तुमारा नाम क्या है मेरा नाम अमरीन है
प्रीटी - तुम यहाँ कबसे काम कर रही हो
अमरीन - जी काफी साल हो गये पर आप क्यों पुच रही हो
सुरभि - ये 301कमरा हमेशा बंद क्यों रहता है
अमरीन - यहाँ एक लड़का रहता था उसका घर था उसका नाम मोहन था वो एक लड़की से प्यार करता था मगर
उस लड़की के पिता ने उस लड़की की शादी किसी और कर दी और मोहन को मरवा दिया और उसकी आत्मा आज तक यही भटक रही है ....
अदिति - ये तो बहुत इमोशनल स्टोरी है और हॉरर भी
सुरभि - यार बेचारा वो तो बहुत सीधा था क्या गलती थी बचारा मारा गया
चलो सो जाते है प्रीटी रात बहुत हो गयी है
रात के बारह बजे
सुरभि - ये चिलाने की आवाज कहाँ से आरही है प्रीटी तो सो रही है शायद उस नौकरानी की बात से डर रही हूँ
नेक्स्ट डे मोर्निंग
सुरभि - यार मेरी तबियत थोड़ी ख़राब है आज में तुम लोगो के साथ नहीं जा पाऊँगी तुम लोग क्लाइम्बिंग के लिए जाओ
थोडा पानी पी लेती हूँ अरे जग में तो पानी ही नही है नीचे से लाना पढ़ेगा
सौरभ - हेल्लो में सौरभ हूँ आप यहाँ पे क्या करने आई है में तो
घूमने आया हूँ
सुरभि - में यहाँ समर कंप पर आई हूँ अपने फ्रेंड्स और टीचर के साथ चलो मेरा रूम में में काफी बोर हो रही हूँ
प्रीती - सुरभि ये कोन है
सुरभि - ये सौरभ है ये भी हमारे होटल में ही रुका है घूमने आये है
सौरभ - हेलो आप कौन
प्रीती
आरती हम सुरभि के फ्रेंड्स है
सौरभ - बाय अब में जा रहा हूँ तुम लोग एन्जॉय करो
प्रीती - ओ हो तुमारा तो बड़ाआचा फ्रेंड बन गया एक दिन में
अदिति - काफी खुश लग रही हो
सुरभि - बस अब चुप भी हो तुम लोग
अदिति - वैसा देखने में इतना बुरा भी नही लगता
सुरभि - बस अब अब सो जाओ
कुछ दिनों तक वो लोग एक दूसरा के साथ टाइम स्पेंट करते है और काफी आचे दोस्त बन जाते है और वो दोनों प्यार करना लगते है
फिर एक दिन लड़की के जाने के जाने ka दिन आया जाता है वो दोनों काफी उदास हो जाते है जब सुरभि आपना घर पचुती है वो सौरभ को भी वहाँ बुला लेती है वोउसको वाही परउसकी जॉब लगवा देती है पैर एक सच जो सौरभ अपनी ज़िन्दगी के बारे में सुरभि से बताना चाहता था
सौरभ - तुमे यद् है न सुरभि जब तुमनेहोटल की नौकरानी से रूम नो 301 के बारे में पुछा था तो उसने एक लड़के मोहन के बारे में बताया था में ही वो हूँ हाँ में उसकी आत्मा हूँ होटल में किसी को ढूंड रहा हूँ फिर एक दिन मैंने तुमको देखा तुमारी शकल बिलकुल वर्तिका की तरह है
सुरभि क्या तुम आत्मा हो?? मैंने तो तुम्हे अपना सबसे अच दोस्त माना था और तुम ...
सौरभ - मैं जनता हूँ मैंने गलत किया मुझे तुमकोपहले ही बता देना चाहिए था मगर नही बता सका
सुरभि - तो क्या तुम उस दुनिया को मेरा लिए भूला दोगेमेरे साथ आत्मा बनके रहोगे
सौरभ हाँ क्यों नही
सुरभि - क्या तुम मुझेसे शादी करोगे
सौरभ - ओह हाँ मतलब तमने मुझे माफ़ कर दिया थैंक यू सो मच ....
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