यंग इंडिया कहे जाने वाला भारत अब धीरे धीरे बुजुगियत की तरफ बघणे
लगा है | देश की
कुल आबादी में बुजुर्गो की हिसेदारी लगातार बड रही है इसमें भी चिनताजनक यह है की
बुजुर्ग महिलायों की दो तिहाई आबादी अपनी रोज मर्रा की जरुरतो को पूरा करना के लिए
दूसरो पर निर्भर है बीता दो दशक में देश में बुजुर्ग महिलायों की संख्या पुरुषों
के मुकाबले तेजी से बढ़ रही है |
सरकार की एक सर्वे रिपोर्ट बताती है की चाहे शहर हो या गाव, अब उम्र
को लेकर बहुत अंतर नहीं रह गया है दोनों ही इलाको में बुजुर्गो की संख्या सामान है | 2011 की जनगणना के हिसभ
से देश की कुल आबादी में बुजुर्गो की हिसेदारी 8.6 फिसद हो गयी
है 2001 में यह हिस्सा 7.4 फिसद था केंद्रीय सांख्यकीके विभाग की एक ताजा रिपोर्ट
के मुताबिक बुजुर्गो की इस संख्या में महिलायों की हिस्सेदारी की कुल आबादी का नौ
फिसद है तो पुरुष 8.2 फिसद है 2011 की जनगढ़ना के मुताबिक देश में 10.40 करोड़ बुजुर्घ है |
बुजुर्गो की इस आबादी में सबसे चिंताजनक बात यह है की आथिर्क लिहाज से
बुजुर्घ महिलायों की स्तिथि एकदम बेहाल है | गावों में केवल 14 फिसद और शहरो में 17 फिसद बुजुर्घ
महिलाये ही आथिक द्रस्टी से अपने बच्चोपैर ही निर्भर है जबकि 17.5फिसद महिलायों की
निर्भरता उनके पति पर है |
केंद्र की रिपोर्ट की रफ़्तार बढ़ने के रुख में एक और चिंताजनक पहलु की
तरफ ध्यान आकर्षित किया है | वर्ष 1991 तक की जनगढ़ना में हमेशा बुजुर्ग पुरुषों
की संख्या में महिलायों की आपेक्षा आधिक रही है लेकिन बीते दो दशक में इस रुख में
बदलाव आया है |
रिपोर्ट के मुताबिक देश में बुजुर्गो की संख्या बघणे की एक वजह औसत
आयु में वृधि भी है | बेहतर चिकित्य्सा सुविधा दवायों की क्वालिटी में सुधर और म्रत्यु दर
में कमी की वजह से लोगो की औसत आयु लगातार बढ़ रही है | रिपोर्ट के मुताबिक 2001 से 2011 के दशक में बुजुर्गो की आबादी 36 फिसद की रफ़्तार से
बढ़ी है जबकि आबादी बढ़ने की रफ़्तार केवल आठ फिसद है |
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